छत्तीसगढ़ : 11 लाख के ईनाम 6 माओवादियों सहित कुल 22 माओवादियों का पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण।
AOB डिवीजन पार्टी सदस्य, TSC तेलंगाना स्टेट कमेटी, प्लाटून नम्बर 9 एवं 10 के पार्टी सदस्य 11 लाख के ईनाम 6 माओवादियों सहित कुल 22 माओवादियों का पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण।
समर्पण करने वालों में AOB डिवीजन पार्टी सदस्य, TSC तेलंगाना स्टेट कमेटी, प्लाटून नम्बर 9 एवं 10 के पार्टी सदस्य, गंगालूर एरिया कमेटी के हिरमागुण्डा आरपीसी एवं पामेड़ एरिया कमेटी कोण्डापल्ली आरपीसी के सदस्य है शामिल।
अंदरूनी क्षेत्रों में नवीन सुरक्षा कैम्प की स्थापना के साथ शासन की विकासोन्मुखी कार्य सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली एवं शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजना ग्रामीणों तक पहुंचने लगी है। सुरक्षा बलों का ग्रामीणों के साथ हो रहे सकारात्मक संवाद, सामुदायिक पुलिसिंग के तहत् दी जा रही कल्याकारी योजनाओं की जानकारी एवं छ0ग0 शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के व्यापक प्रचार प्रसार से माओवादी संगठन से मोहभंग हुआ है।
संगठन के विचारों से हुआ मोहभंग और मिली निराशा एवं संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद, समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने की चाह के चलते किये आत्मसमर्पण।
वर्ष 2025 में अब तक 107 माओवादियो ने आत्मसमर्पण,143 माओवादी गिरफ्तार एवं 82 माओवादी अलग अलग मुठभेड़ में मारे गए है।
आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने वाले सभी माओवादियों को प्रोत्साहन स्वरूप 25-25 हजार रुपए नगद राशि प्रदान किया गया।
छत्तीसगढ़ ( बीजापुर ) ओम प्रकाश सिंह । पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज, पुलिस महानिरीक्षक केरिपु सीजी सेक्टर छ0ग0 रायपुर, उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज, उप पुलिस महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर के मार्ग दर्शन व पुलिस अधीक्षक बीजापुर के निर्देशन में जिले में चलाये जा रहे माओवादी उन्मूलन अभियान के तहत डीआरजीए बस्तर फाईटर, एसटीएफ, कोबरा व केरिपु बल के द्वारा किये जा रहे संयुक्त प्रयासो से तथा छ0ग0 शासन की पुनर्वास एवं आत्मसर्पण नीति साथ ही छ0ग0 शासन द्वारा चलाये जा रहे, नियद नेल्ला नार योजना से प्रभावित होकर AOB डिवीजन पार्टी सदस्य, TSC तेलंगाना स्टेट कमेटी सहित गंगालूर एरिया कमेटी एवं पामेड़ एरिया कमेटी के कुल 22 माओवादियों ने आज दिनांक 23.03.2025 को पुलिस उप महानिरीक्षक केरिपु बीजापुर देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ जितेन्द्र कुमार यादव, कमांडेंट 222 विरेन्द्र सिंह, कमांडेंट 85वी बटालियन केरिपु सुनील कुमार राही, कमांडेंट 153 बटालियन अमित कुमार, कमांडेंट 168 बटालियन विक्रम सिंह, कमांडेंट 170वी बटालियन सरकार राजा रमन, कमांडेंट 196 बटालियन कुमार मनीष, कमांडेंट 199 बटालियन आनंद कुमार, कमांडेंट 229 बटालियन चंदम बॉबी सिंह, कमांडेंट कोबरा 201 अमित कुमार चौधरी, कमांडेंट 202 कोबरा अमित कुमार, कमांडेंट 205 कोबरा नरेश पवार, कमांडेंट 208 शशी भूषण सिंह बिस्ट, कमांडेंट 210 कोबरा अशोक कुमार, अति0पुलिस अधीक्षक नक्सल अभियान मयंक गुर्जर, अति0 पुलिस अधीक्षक ऑप्स यूलैण्डन यार्क, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस तिलेश्वर यादव, उप पुलिस अधीक्षक डीआरजी विनीत साहू उप पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स सुदीप सरकार, उप पुलिस अधीक्षक बस्तर फाईटर चन्द्रहास के समक्ष आत्मसमर्पण किये।
आत्मसमर्पित माओवादी के नाम एवं पद :-
अपराध एवं स्थाई वारंट की जानकारी :-
छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति और नियद नेल्लानार योजना के कारण कई माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं। यह योजना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जैसे कि पुनर्वास, रोजगार और शिक्षा। इसके अलावा, नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए भी राहत और पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है। यह योजना माओवादियों को आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके परिणाम स्वरूप कई माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं और समाज में शांतिपूर्ण जीवन जीने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति ने कई माओवादियों को नई उम्मीद दी है और उन्हें संगठन के भीतर शोषण और क्रूर व्यवहार से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है। यह नीति उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की आशा देती है। इसके अलावा सुरक्षा बलों के लगातार अंदरूनी क्षेत्रों में कैम्प स्थापित करने और क्षेत्र में चलाए जा रहे आक्रामक अभियानों ने भी माओवादियों को संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। आत्मसमर्पित माओवादी क्षेत्रान्तर्गत सक्रिय रूप से कार्यरत रहे हैं और अब वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। यह पुनर्वास नीति छत्तीसगढ़ शासन की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य माओवादियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना और उन्हें सामान्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।
आने वाले समय में और भी नक्सलियों के संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण करने की आसूचना प्राप्त हो रही है। आत्मसमर्पण कराने में डीआरजी, बस्तर फाईटर, एसटीएफ केरिपु 85, 153, 168, 170, 196, 199, 222, 229 एवं कोबरा201, 202, 205, 208, 210 का विशेष योगदान है। इस प्रकार माओवादियों के हो रहे आत्मसर्पण से शीर्ष माओवादी कैडर के लिए बड़ा नुकसान हुआ है। नक्सल मुक्त बस्तर की कल्पना साकार रूप ले रहा है।
छ0ग0 शासन की पुनर्वास नीति के व्यापक प्रचार-प्रसार { पुनर्वास योजना के तहत लाभ व परिवार के साथ खुशहाल जीवन जीने की सोच लिये समाज के भटके माओवादियों ने संगठन में उनके कार्यो की उपेक्षा करने } भेदभाव पूर्ण व्यवहार एवं माओवादियों के द्वारा आदिवासियों पर किये जा रहे अत्याचार से त्रस्त होकर,छ0ग0 शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीतियों से प्रभावित होकर भारत के संविधान पर विश्वास रखते हुए उक्त माओवादियों द्वारा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया गया। आत्मसमर्पण करने पर इन्हें उत्साहवर्धन हेतु शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत् 25000-25000/- रूपये पच्चीस हजार रूपये नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान किया गया।
0 Comments